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प्रतिमा या चित्र की स्थापना:- जिस देवता से संबंधित मंत्र का जप कर रहे हैं, उनकी प्रतिमा या चित्र अपने सामने रखें। जप आरंभ करने से पहले देवता की पूजा करें।
उस पात्र का जल २४ घण्टे बाद किसी वृक्ष पर चढ़ा दें।
हमारे हिंदू धर्म में ऐसी कई प्राचीन तांत्रिक साधना और मंत्रों का उल्लेख है, जिनके द्वारा व्यक्ति असंभव से असंभव काम को भी कर सकता है
साधना के समय जल का लोटा अपने पास रखें।
जब ऐसा हो जाता है तो कहते हैं कि मंत्र सिद्ध हो गया। ऐसा मंत्र को लगातार जपते रहने से होता है। यदि आपका ध्यान इधर, उधर भटक रहा है तो फिर मंत्र को सिद्ध होने में भी विलंब होगा। कहते हैं कि 'करत-करत अभ्यास से जडमति होत सुजान। रसरी आवत-जात से सिल पर पड़त निसान॥'
गुरु की भूमिका:- शाबर मंत्रों की सिद्धि के लिए गुरु से दीक्षा लेना आवश्यक है। गुरु के निर्देशों का पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पालन करें।
साधना काल में साधक अपने वस्त्र, जूठे बर्तन. आदि स्वयं साफ करें।
गुरु मंत्र की दीक्षा लेना अनिवार्य है।
साधना के read more लिए एक निश्चित समय और स्थान का पालन करें।
जानिए शाबर मंत्र पढ़ने के नियम, तांत्रिक परंपरा का हिस्सा है ये मंत्र
उत्तरपथ में आप बठी, हाथ सिद्ध वाचा ऋद्धि-सिद्धि । धनधान्य देहि-देहि कुरु-कुरु स्वाहा ।।
उदाहरणार्थ यदि आपके मन में एक साथ एक हजार विचार चल रहे हैं तो उन सभी को समाप्त करके मात्र एक विचार को ही स्थापित करना ही मंत्र का लक्ष्य होता है। यह लक्ष्य प्राप्त करने के बाद आपका दिमाग एक आयामी और सही दिशा में गति करने वाला होगा।
कुछ नया जानने और सीखने की जादुई दुनिया !
साधना के लिए एकांत और शुद्ध स्थान का उपयोग करें।